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हरितालिका तीज व्रत 2025: महत्व, पूजा विधि और पौराणिक कथा Haritalika Teej Vrat 2025: Significance, Puja Vidhi and Legend

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परिचय भारत में व्रत-त्योहार केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। इन्हीं में से एक है हरितालिका तीज व्रत, जिसे विशेष रूप से भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से सौभाग्यवती स्त्रियों तथा अविवाहित कन्याओं द्वारा किया जाता है। इस दिन स्त्रियां भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। हरितालिका तीज व्रत का महत्व 1. इस व्रत को करने से सौभाग्यवती स्त्रियों को अखंड सुहाग का वरदान मिलता है। 2. अविवाहित कन्याएं इस व्रत को उत्तम पति प्राप्ति के लिए करती हैं। 3. यह व्रत केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास को भी मजबूत करने वाला पर्व है। 4. इसे निर्जला व्रत कहा जाता है क्योंकि महिलाएं दिनभर बिना अन्न-जल के व्रत रखती हैं। हरितालिका तीज व्रत की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिमालय की पुत्री पार्वती जी ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने की दृढ़ निश्चय किया। उन्होंने कठोर तपस्या की और कई वर्षों तक भगवान शिव की आराधना की। कथा...

रक्षाबंधन: एक पवित्र बंधन का त्योहार / Raksha Bandhan: The festival of a sacred bond

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✨ रक्षाबंधन: एक पवित्र बंधन का त्योहार रक्षाबंधन हिन्दू धर्म का एक प्रमुख और पावन पर्व है, जो भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और रक्षा के अटूट रिश्ते को समर्पित होता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं भाई उन्हें जीवन भर सुरक्षा देने का वचन देते हैं। 📜 रक्षाबंधन की शुरुआत कब और क्यों हुई? रक्षाबंधन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, लेकिन इसका स्पष्ट आरंभ बताना कठिन है क्योंकि यह त्योहार वेद-पुराणों, महाभारत और इतिहास में अनेक रूपों में वर्णित है। 🔹 देवी देवताओं की कहानियां 1. राजा बलि और भगवान विष्णु की कथा दैत्यराज बलि ने भगवान विष्णु से वचन लिया कि वह सदैव उसके पास रहें। माता लक्ष्मी ने यह स्थिति ठीक न पाकर गरीब स्त्री के वेश में बलि के पास जाकर उसे राखी बांधी और भाई मानकर अपना घर वापस ले जाने का वर मांगा। बलि ने वचन निभाया और भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी के साथ लौटने दिया। 2. द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कथा जब श्रीकृष्ण ने शिशुपाल को मारते समय उंगली काट ली थी, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड...

डाकू रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की प्रेरणादायक कथा / Inspirational story of becoming Maharishi Valmiki from dacoit Ratnakar

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🌟 डाकू रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की प्रेरणादायक कथा बहुत समय पहले की बात है। एक वन में रत्नाकर नाम का व्यक्ति रहता था। वह एक भयावह डाकू था जो जंगल से गुजरने वाले लोगों को लूटता था। कभी-कभी वह निर्दोष लोगों को मार भी डालता था। उसका यह जीवन उसके परिवार के भरण-पोषण के लिए था, जिसे वह अत्यंत प्रेम करता था। परंतु वह नहीं जानता था कि यह जीवन उसे किस अंधकार की ओर ले जा रहा है। --- 🌿 एक दिन सब बदल गया... एक दिन महर्षि नारद उस वन से गुजर रहे थे। रत्नाकर ने उन्हें भी लूटने की कोशिश की। नारद जी मुस्कराए और बोले, "वत्स, क्या तुम यह सब अपने परिवार के लिए करते हो?" रत्नाकर ने उत्तर दिया, "हाँ, मैं यह सब अपने परिवार के लिए करता हूँ।" तब नारद जी ने एक गहरा प्रश्न किया: "जब तुम पाप करते हो, क्या तुम्हारा परिवार भी उन पापों में भागीदार बनेगा?" रत्नाकर को लगा कि हाँ, जरूर बनेंगे। परंतु नारद जी ने कहा: "जा, अपने परिवार से जाकर यह पूछो।" --- 🏠 परिवार का उत्तर: रत्नाकर घर गया और एक-एक करके अपने पत्नी, बच्चों और माता-पिता से पूछा, "क्या आप मे...

"Celebrate Friendship Day: दोस्तों के नाम एक खास दिन"

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Friendship Day: दोस्ती का त्योहार हर साल अगस्त महीने का पहला रविवार Friendship Day यानी मित्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन हमारे जीवन में दोस्तों के महत्व को समझने और उन्हें धन्यवाद देने का एक खास अवसर होता है। दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो खून का नहीं होता, लेकिन फिर भी दिल से जुड़ता है। यह वह बंधन है जो सुख-दुख, सफलता-असफलता, हर हाल में साथ निभाता है। 🌟 दोस्ती का महत्व कहा जाता है कि "सच्चा दोस्त वह है जो आपके आंसुओं को मुस्कान में बदल दे।" जीवन में माता-पिता, भाई-बहन हमारे जन्म के साथ मिलते हैं, लेकिन दोस्ती वह रिश्ता है जिसे हम खुद चुनते हैं। एक सच्चा दोस्त जीवन की सबसे बड़ी दौलत होता है। 🕉️ श्रीकृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता जब भी सच्ची दोस्ती की मिसाल दी जाती है, तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा का नाम सबसे पहले आता है। एक तरफ श्रीकृष्ण द्वारका के राजा थे, तो दूसरी ओर सुदामा एक गरीब ब्राह्मण। लेकिन उनके बीच की मित्रता इतनी गहरी थी कि भौतिक अंतर कभी आड़े नहीं आया। जब सुदामा वर्षों बाद अपने मित्र कृष्ण से मिलने गए, तो खाली हाथ थे, लेकिन उनके ...

हरेली तिहार: छत्तीसगढ़ की हरियाली का पर्व Hareli Tihar: Festival of Greenery in Chhattisgarh

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हरेली तिहार: छत्तीसगढ़ की हरियाली का पर्व हरेली यानी ‘हरियाली’—छत्तीसगढ़ का पहला और प्रमुख तिहार, जो सावन मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या (श्रावण अमावस्या) को बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह त्यौहार आमतौर पर जुलाई–अगस्त में आता है और यह वर्षा-ऋतु, हरियाली और समृद्धि का प्रतीक है । 🌾 त्यौहार की खासियत और इतिहास हिन्दू कैलेंडर में दिन: सावन की अमावस्या महत्व: यह कृषि प्रधान समाज का पहला पर्व है, जिसमें खेती की शुरआत, प्राकृतिक ऋतु और समृद्धि का आभार व्यक्त किया जाता है । नाम का अर्थ: हरेली शब्द हिंदी के ‘हरियाली’ से आया है, जिसका अर्थ है प्रकृति में ताज़गी और नवजीवन । 🧿 पूजा-पाठ और रीति-रिवाज 1. खेती-किसानी का आभार किसान अपने खेतों में हल, कुदाली, फावड़ा, ट्रैक्टर आदि कृषि उपकरणों की पवित्र पूजा करते हैं और उन्हें चावल-आटे की चिलों से सजाते हैं । 2. वृक्ष-स्वास्थ्य उपाय खेतों में भेलवा (बेलवा) की डालियाँ लगाई जाती हैं और घरों के मुख्य द्वार पर नीम की ताज़ा पत्तियाँ लटकाई जाती हैं—नीम की प्राकृतिक कीट-रोधी ताकत का लाभ लेने के लिए । 3. पशुधन और मावली रक्षा पशुधन को विशेष औषध...

🌿 सावन का महत्त्व, कहानी और नियम 🌧️. Importance, story and rules of Sawan

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🌿 सावन का महत्त्व, कहानी और नियम 🌧️ 🔷 सावन क्या है और क्यों मनाया जाता है? सावन , हिन्दू पंचांग का पाँचवां महीना होता है जो जुलाई-अगस्त में आता है। यह महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और इसमें भक्ति, वर्षा, हरियाली और पूजा का विशेष महत्व होता है। 📖 सावन की पौराणिक कहानी: 🔸 एक बार देवता और असुरों ने समुद्र मंथन किया, जिससे अमृत के साथ-साथ भयानक विष (हलाहल) भी निकला। 🔸 यह विष पूरे ब्रह्मांड को नष्ट कर सकता था। तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए वह विष पी लिया । 🔸 माँ पार्वती ने उनका गला पकड़ लिया जिससे विष नीचे न उतर पाए, और शिव का कंठ नीला हो गया। तभी से उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा। 🔸 विष की गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें गंगाजल, बेलपत्र, और दूध अर्पित किया। 🔸 तभी से सावन में शिव पूजा और जल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। 🕉️ सावन में क्या करना चाहिए? ✅ 1. शिव की पूजा करें: रोज सुबह स्नान करके शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, भस्म, धतूरा आदि चढ़ाएं। ✅ 2. सावन सोमवार का व्रत रखें: सावन के हर सोमवार को व्रत रखकर “ॐ नमः शिवाय” का जाप क...

🌺 माता पार्वती की कहानी – सावन विशेष कथा 🌺 Story of Mother Parvati – Sawan Special Story

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🌺 माता पार्वती की कहानी – सावन विशेष कथा 📖 कथा: माता पार्वती का शिव को पाने के लिए कठोर तप एक समय की बात है, माता सती ने जब अपने पिता दक्ष के यज्ञ में शिव का अपमान होते देखा, तो उन्होंने आत्मदाह कर लिया। इसके बाद उन्होंने हिमालय और मेनावती के घर पार्वती रूप में पुनर्जन्म लिया। माँ पार्वती ने बाल्यकाल से ही भगवान शिव को अपना पति मान लिया था। लेकिन शिव जी उस समय तप में लीन रहते थे, संसार से दूर और विरक्त। 🌄 तब पार्वती जी ने क्या किया? उन्होंने शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की। उन्होंने घने जंगल में, बारिश, धूप और ठंड सहकर तप किया। कई महीनों तक केवल पत्तों पर, फिर निर्जल व्रत रखकर तपस्या करती रहीं। उनकी यह तपस्या सावन के महीने में चरम पर थी। 🌼 शिव जी का हृदय पिघला: उनकी भक्ति और संकल्प देखकर भगवान शिव प्रकट हुए। उन्होंने पार्वती जी को वरदान दिया कि वे ही उनकी अर्धांगिनी (पत्नी) बनेंगी। इसके बाद दोनों का विवाह संपन्न हुआ — यह विवाह देवताओं के लिए भी आदर्श बन गया। 🧘‍♀️ इस कथा से क्या सीख मिलती है? सच्ची श्रद्धा, धैर्य और तप से क...