रक्षाबंधन: एक पवित्र बंधन का त्योहार / Raksha Bandhan: The festival of a sacred bond

रक्षाबंधन: एक पवित्र बंधन का त्योहार
रक्षाबंधन हिन्दू धर्म का एक प्रमुख और पावन पर्व है, जो भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और रक्षा के अटूट रिश्ते को समर्पित होता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं भाई उन्हें जीवन भर सुरक्षा देने का वचन देते हैं।

📜 रक्षाबंधन की शुरुआत कब और क्यों हुई?

रक्षाबंधन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, लेकिन इसका स्पष्ट आरंभ बताना कठिन है क्योंकि यह त्योहार वेद-पुराणों, महाभारत और इतिहास में अनेक रूपों में वर्णित है।

🔹 देवी देवताओं की कहानियां

1. राजा बलि और भगवान विष्णु की कथा
दैत्यराज बलि ने भगवान विष्णु से वचन लिया कि वह सदैव उसके पास रहें। माता लक्ष्मी ने यह स्थिति ठीक न पाकर गरीब स्त्री के वेश में बलि के पास जाकर उसे राखी बांधी और भाई मानकर अपना घर वापस ले जाने का वर मांगा। बलि ने वचन निभाया और भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी के साथ लौटने दिया।


2. द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कथा
जब श्रीकृष्ण ने शिशुपाल को मारते समय उंगली काट ली थी, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया। श्रीकृष्ण ने इस ऋण को चुकाने का वचन दिया और चीरहरण के समय द्रौपदी की रक्षा की।
👉 यह कथा भाई-बहन के बीच आत्मिक रिश्ते और सुरक्षा की भावना को दर्शाती है।


3. सती सावित्री और यमराज की कथा
कुछ पौराणिक मान्यताओं में कहा गया है कि सावित्री ने यमराज को राखी बांधी और अपने पति के जीवन की रक्षा की याचना की, जिससे रक्षाबंधन केवल भाई-बहन तक सीमित न रहकर रक्षा और समर्पण का प्रतीक बन गया।


🧵 रक्षाबंधन का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह पर्व एक पवित्र संकल्प है, जिसमें बहनें रक्षा की याचना करती हैं और भाई उसका पालन करने की प्रतिज्ञा लेते हैं।
सामाजिक दृष्टिकोण से, यह पर्व परिवारों को जोड़ता है, रिश्तों को मजबूत करता है और आपसी विश्वास को बढ़ाता है।


📅 रक्षाबंधन कब मनाया जाता है?

रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह दिन जुलाई-अगस्त के बीच आता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं, तिलक करती हैं और मिठाई खिलाती हैं। भाई उन्हें उपहार देते हैं और उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं
रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और आत्मिक जुड़ाव का प्रतीक है। यह त्यौहार यह सिखाता है कि रिश्ते केवल खून के नहीं, भावना और विश्वास से भी बंधते हैं। रक्षाबंधन की कहानियाँ हमें यह संदेश देती हैं कि जहां रक्षा और प्रेम है, वहां ईश्वर भी साथ होते हैं।

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